विदेशो में जमा कालेधन को लेकर सिविल सोसाइटी के आन्दोलन के चलते केंद्र सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ काम तो कर रही है, परन्तु उसके द्वारा उठाये कदमों से न तो सिविल सोसाइटी के लोग ही संतुष्ट नजर आ रहे हैं और न ही आम जनता | एक तरफ दिल्ली के जंतर मंतर पर अन्ना हजारे द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध किये गए अनशन को सोनिया गाँधी का समर्थन और दूसरी तरफ रामलीला मैदान में भ्रष्टाचार के ही मुद्दे पर अनशन पर बैठे बाबा रामदेव व उनके समर्थकों पर आधी रात में दमनात्मक कार्यवाही के परिनामस्वरूफ़ सरकार विपछ के साथ साथ आम जनता के निशाने पर आ चुकी है | यह सच है की भारतीय संविधान के तहत सिविल सोसाइटी की मांगों को आधार मानकर कानून बनाने के लिए सरकार को बाध्य नहीं किया जा सकता, परन्तु भ्रष्टाचार के चंगुल में फंसे भारत देश को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने में इन आंदोलनों की जरुरत ही क्यों पड़ी ? इस सवाल को सत्ता रूढ़ पार्टी को गंभीरता से लेना होगा और इस ज्वलंत मुद्दे पर आक्रामक रुख के बजाए शालीनता दिखाते हुए कुछ ऐसे निर्णय लेने होंगे जिससे देश के जनमानस में पनपे अविश्वास पर विराम लग सके और लोगो को आसानी से समझ आ सके की सरकार स्वयं भ्रष्टाचार के खिलाफ है और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है |पिछली भाजपा सरकार में यह साबित हो चूका है की दूध के धुले भाजपा नेता भी नहीं है|आज वो केवल कांग्रेसियो को भ्रष्टाचार के कटघरे में खड़ा करके सत्ता हासिल करने के प्रयास में हैं| बाबा रामदेव के ऊपर संघ के इशारे पर सरकार को बदनाम करने का आरोप तो लगाया जा सकता है परन्तु साफ़ सुथरी छवि वाले गाँधी वादी नेता व समाजसेवी अन्ना हजारे को हलके में लेना शायद एक बड़ी भूल होगी |लोगो में खास चर्चा है की यदि अन्ना हजारे अनशन न करते तो सरकार कुछ भी न करती | आम आवाज है की ये अन्ना हजारे के दबाव का ही नतीजा है की आज सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सक्रीय है | यह सत्य है की यदि केंद्र सरकार अपने अहम की खातिर अन्ना की अनदेखी करती है तो कांग्रेस का भला होनेवाला नहीं है | पार्टी के जो रणनीतिकार सिविल सोसाइटी से कडाई बरतने और इनकी अनदेखी करने का सुझाव दे रहे है वह आग में घी डालने जैसा है जिसका परिणाम निकट भविष्य में पार्टी के लिए अहितकर साबित हो सकता है |आज आम जनता में विश्वास ज़माने के लिए भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने के साथ ही बेहतर होगा की सिविल सोसाइटी में साख रखनेवाले अन्ना हजारे जैसे साफ़ सुथरे समाजसेवियों के साथ अपेछित व्यवहार किया जाये, जिसे लोग सही समझेंगे |
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